Thursday, August 4, 2011

Zinda ho TUM????????

Dilonme corruption sahne ki takat hai to Zinda ho tum...
Dilonme roj ke attack sahne ki himmat hai to Zinda ho tum..
roj ki bambari ke baad bhi dar darke wapis wapis raste pe aao..
To zinda ho tum...
labonpe mahangai ki takrar hai to zinda ho tum..
facebook aur tweeter pe deshbhakti dikhao to zinda ho tum...
bhala desh ki halat chahiye jitni bekar hai..zinda to ho tum...
Desh ki halat sudharanaa..sirf vichar hai aur kaho zinda ho tum..
khudke mulk me chahe jitne lachar hai.. lekin zinda to fir bhi ho tum..
sabse bada to sala yaha brashtachar hai tabhi bhi zinda ho tum..
Anna Hajare ki bhuli hui lalkar hai...to zinda ho tum
aawaj uthane wale pe lathichar hai to zinda ho tum..
har chij pe rote bar bar hai aur zinda ho tum..
khudpe rou ya hasu pata nahi chale to zinda ho tum..
bhala ho ghar me hi lutmar to zinda ho tum....
huh!!! kya sach much me Zinda ho TUM???????? 

Wednesday, August 3, 2011

क्षण गहिरे ....!!!!

क्षण गहिरे आसुसलेले 
प्रेमाच्या थेम्बांसाठी 
मन काही हिरमुसलेले 
अनदेख्या स्वप्नांसाठी 
दिस होते ते मंतरलेले 
आनंदाच्या आशेपोटी 
आठवणी कुरतडलेल्या 
मित्रांच्या अवती भोवती 
उगाचच भांडलेल्या
आपल्याच जीव्हाल्यापोटी
रोज रोज त्रासलेल्या 
जागून अभ्यासासाठी 
योजना त्या आखलेल्या 
काहीतरी बनण्यासाठी 
क्षण सगळे ते आता धूसर 
आठवणी कुजलेल्या 
जिव्हाळा टिकवून ठेवला 
मात्र अंतर थोडेसे वाढलेले 
क्षण ते सगळे जपलेले 
रोज मनात दाटण्यासाठी
क्षण गहिरे ....!!!!

Monday, August 1, 2011

Dil pe dastak di thi kisine aaj.. !!!

Dil pe dastak di thi kisine aaj..
Dil ne na jane suni kiski aawaj..
Dhadak ke dil ne achanak se
Sunane ki koshish..
Jane kaunsi viraniyo me wo kho gayi..
Thi to wo jani pahchanisi..
Thi to wo suni sunisi..
Do labjomebhi tadapa gayi thi woh..
Ruh ko kuch is taraha se jaga gayi thi woh...
Dhundhane ki usko ki jitni bhi koshish..
Dur hone ka ahsaas badhata gaya..
Dil ki batonme khone lage kuch is kadar..
Bass dhundhata fire use dar badar...
Ab to gunjati aawajon me firta rahta hai..
Aur dil ki dastak ko sunta rahta hai ye..
Na jane wo dastak dene wali kab hakikat me hamase milegi..
Inhi khayalon me har lamha gujarata hai ye..
Dil pe dastak di thi firse kisine aaj..
Ab to kaun hai wo ye sochane se bhi katarata hai ye...

Tuesday, July 5, 2011

मौसम के इशारोंको ..... !!!!!

मौसम  के  इशारोंको  समझो  जरा
सबकुछ  हसीं  और  हरा  भरा ..
बारिश  की  बुँदे  यूँ  गिरे  बदनपर
चाय  की  आए  याद  और  चस्का  जबानपर  ..
रिम  झिम  रिम  झिम  की  लगी  है  धुन
और  इस  मौसम  के  दिलके  तरानोको  सुन ..
सडकोंपे  घूम  रहा  है  पानी ..
पकोड़ोंकी  याद  तो है  ही  आनी...
सन सन हवाओंकी अलग है कहानी 
याद आये पल भर में बचपन से जवानी 
सर सर पत्ते है उड़ाते जाते 
बारिश के मौसम में सब भीग जाते 
गीली हो जमीं और गिला हो चमन
और है भीग जाते सबके बदन 
भीगी लडकियोंको देखके बजायी हुई सीटियाँ 
और फुलोंपे मदराते भवरे और तितलिया
सब कुछ है कितना हसीं और सुहाना 
बारिश के मौसम का आशिक तो पूरा जमाना 
मौसम के इशारोंको समझो जरा 
और बारिश के बुन्दोंमे आओ भिगलो जरा !!!!! 
 

Monday, July 4, 2011

काटोंकी राहोंमे !!!!

काटोंकी  राहोंमे  खो  गया  कुछ  इस  कदर ..
अह्सांस की दुनिया में भटकू दर बदर..
अभी भी इंतज़ार है कुछ बिखरे ख्वाबोंका..
अभी भी इंतज़ार है उन सुनहरे खयालोंका 
की कब वो खयालोंकी दुनिया से हकीकत में बदले
और कब राहोंके काटे  फूल बनके
हवाओंमे अपने खुशबु   से हसीं सी तमन्नाये जगाये 
तमन्नाओंके अंजुमन में कुछ तराने भी सिमटते जाये 
और उन्ही के फ़साने जिंदगी के पन्नोमे लिखे जाये 
लिखा हुआ हर तराना और फ़साना  अब बस 
हर किसी की ज़िन्दगी में हसी और ख़ुशी की लहरे लाये
काटोंसे युहीं किसीका दामन ना कभी अब फटेगा 
राहोंसे अँधियारा जल्दीही हटेगा 
वक़्त की इस कशमकश से हो हर कोई अब वाकिब 
और देखके हसी ज़मिनको खुद अर्ज़ करे ग़ालिब 
उसे भी उन चमन और बहरोंसे प्यार हो जायेगा 
और काटों भरी राहोंसे हर राही रास्ता बनाएगा 
 ऐसे ख्वाबोंको तो रोज़ ही देखता हूँ मैं 
पर काश की कुछ करिश्मा हो जाता 
और हर ख्वाब मेरा हकीकत में बदल जाता 
इस हसीं ज़िन्दगी में कभी भी किसीको गम नहीं होता 
पर यही तो फर्क है हकीकत और ख्वाबोंमे 
हर कुछ हासिल होता है खयालोंमे 
हकीकत तो कुछ और ही होती है 
और उन्ही ख्वाबोंके पीछे ये ज़िन्दगी रोती है 
अब तो ज़िन्दगी को  भी फुलोंसे ज्यादा 
कान्टोसे  प्यार है 
क्यूंकि हर रास्ते का काटा खोलता सपनोंका द्वार है 






Friday, June 10, 2011

खामोशी से .. !!!!!

खामोशी  से  दिल  ने  सबकुच  सहा ...
खामोश  रहे  और  कुच  न  कहा ...
खामोश निगाहे, खामोश राहे, और खामोश थे हम ....
इस खामोशी मी काही निकल न जाये दम... 
खोमोशी से देखे थे सपने कई ..
राहे थी जुदा लेकीन मंजिल थी वही ...
खामोश लबोपे खामोश तराने थे 
खामोश लाम्होन्मे भी खामोश फसाने थे...
तू खामोशिसेही खामोशी को सून 
तू खामोश बनके खामोशी हि चून 
खामोश लब्जोन्से हि खामोश है धून 
खामोश जहान खामोश हम और खामोश तुम ... 
दिलने भी तुमको पुकारा है खामोशी से 
दे दे आवाज तुभी आज खामोशी से.. 
आन्खोन्की हो बोली और  धडकन कि जुबान 
चाहे आन्खोन्को हि कह दो  आज तीर कमान 
बस दिल को लागलो थोडी सी लगाम 
और खामोशी से हि करू मै  तेरे दिल को सलाम .. 
खामोश दिल खामोश धडकन और खामोश है ये पल..
और खामोशी से हि तू आज जमाने से जल 
खामोश लम्होमे करले तू जिंदगी को उजागर...
खामोशी सेही बनजा तू सपनोंका सौदागर...
खामोशी से .. !!!!!  




Wednesday, June 8, 2011

अवखळ खट्याळ !!

अवखळ  खट्याळ   डोळे  आणि  सुंदरसं  हास्य ..
मनमोहक  अदा  आणि  स्वभाव  जणू  रहस्य ..
हसताना  बारीक  केलेले  डोळे  आणि  हळूच  मागे  झालेले  नाक 
डोळ्यातली  ती  चमक  आणि  मन  लुटणारी  तिची  ती  हाक 
तिची  ती  सदा  न   कदाची  बडबड .. सुद्धा  छान  वाटते 
तिचे  ते  न  कळणारे  संवाद  सुद्धा  मन  भारावून  टाकतात 
तिचा  रुसवा  फुगवा  सगळ  काही  छान  वाटत
तिच्या  त्रासलेल्या  आवाजात  माझ्या  वर  चिडणं  सुद्धा  मोहवून  टाकत 
तिचे  ते  कधी  कधी  विस्कटलेले   केस ..
आणि  वाऱ्याने  इकडे  तिकडे  अलगद  उडणाऱ्या  त्या  लता 
उगाचच  मसून  बनून  केलेल्या  त्या  निरागस  अदा
कधी  कधी  उग्गाचाच  सिरिअस होणं  ..
पण  हसताना  मात्र  खळ  खळून  हसणं 
छोट्या  छोट्या  गोष्टीत  सुद्धा  आनंद  घेणं 
आणि  मोठ्या  गोष्टीना  सुद्धा  असच   उडवणं 
आयुष्य  खरच  किती  मस्त  मस्त
तुझं  मात्र  नेहमीच  व्यस्त ...
तरी  सुद्धा  त्यातून  काढतेस  नेहमी  वेळ 
आयुष्याचे  गीत  किती  हे  सुरेल 
आणि  तुझ्यामध्ये  कोणाचाही  मन  सहजच  रमेल !!! :)

Wednesday, April 6, 2011

ना जाने कैसी ही ये जिन्दगानी ....||

 हि  कविता माझ्या एका जुन्या पोस्टचा भाग होती....आज इतक्या वर्षांनंतर पूर्ण करायचा प्रयत्न करतोय ....


क्षणात  आपले  असते  कोणी ....
क्षणात  नसे  कोणी ....
क्षणात  गातो  आपण  गाणी ....
क्षणात  डोळ्यात  पाणी ...
क्षणात  बसते  ,क्षणात  उठते ,
क्षणात  कितीतरी  आठवणी ...
क्षणा  क्षणात  बदलते  वाणी ...
ना  जाने  कैसी  ही  ये  जिन्दगानी ... ||
जीवनाच्या खेळातला मीच खरा राजा
छोट्याशा गोष्टीचा देखील करतो गाजा वाजा
आठवणींच्या  साम्राज्यामध्ये जखमा ताज्या ताज्या
लाजिरवाण्या असो किवा स्वाभिमानाच्या माझ्या
सुख्दुक्खाच्या धाग्यांनी गुंफलेल्या आठवणी
सुन्न करून टाकतात या आपणाला अंतर्मनी
सुज्ञ अशा त्या जणू आकाशवाणी
ना  जाने  कैसी  ही  ये  जिन्दगानी ... ||
भितींच्या अंधाऱ्या राज्यात  कोण कुठला राजा
सर्वच राजांचा येथे वाजतो band बाजा
आयुष्याचा खेळ आहे हा नाही गम्मत गाणी
ना जाने कैसी ही ये जिन्दगानी ....||







Tuesday, April 5, 2011

क्षणात !!!!

क्षणा  क्षणात येणाऱ्या क्षणांचा काही क्षणात विचार कर 
मना मनातल्या चांगल्या मनांचा मनापासून विचार कर 
जनातले कि मनातले हि दुविधा कशासाठी 
जणांसाठी कि  मनासाठी हि दुविधा कशासाठी 
काही  क्षणात कोणी तरी मनात येते 
तर काही मनांना क्षणही पुरत नाहीत 
काही क्षण अद्भुत असे 
काही क्षण अद्वितीय 
काही  क्षण अप्रतिम 
तर काही क्षण अगदीच क्षुल्लक
मनाचेही काहीसे तसेच 
पण मनापासून ओळख
खऱ्या मनाची मनापासून तूच कर पारख 
कलुषित  मानांपासून मात्र नेहमीच राहा सावध
चांगले  वाईट  तूच ठरव
तूच तुझ्या आयुष्याचा शिल्पकार 
सद संगती आणि दुष्टांना दूर ठेव 
त्यानेच  मिळेल  आयुष्याला तुझ्या आकार 
क्षणात पाहिलेली स्वप्ने असतात खूप साजरी 
मनापासून करशील तर नक्कीच होतील साकार 
 क्षणा क्षणाने मनाची तू मनाशी सांगड लाव 
 एका क्षणात एक तरी मन जिंकण्याची तू मनाशीच पैज लाव
 सुख दुखः असते मित्रा भलतेच क्षणभंगुर 
 क्षणा क्षणात जागून बघ आयुष्य किती हे सुंदर !!!














Tuesday, March 29, 2011

शिकायत है......!!!

शिकायत है दिल से ये मेरी आज
की उल्झानोंको पार कर
हर मुश्किल रास्ते की युही तबाह कर
मुश्किलें तो जिंदगी का बेतोड़ हिस्सा है
उन्ही के बिच में जिंदगी का किस्सा है
फरयाद है मेरी दिल से ये आज
हर हसीं लम्हे की तू पहचान कर
ये आसमान भी खुला है और ये वादिया भी हसीन
खो जाये उन खुबसुरतियों में ये दुआ कर
खुबसूरत है मौसम और जिंदगी सुहानी
हर एक बिता पल इसमें जैसे कोई कहानी
जिंदगी में आनेवाला हर एक शख्स किसी मकसद से आता है
छोटे छोटे से यादगार पल वो साथ में लाता है
ख्वाहिश है मेरी दिलसे ये आज
हर एक पल को तू बनादे खास
यादोंको तू कुछ बनादे इस कदर यादगार
जिंदगी से हो हमें बेहद इन्तेहा प्यार
आरजू है मेरी दिलसे ये आज
की हर प्यार की आरजू पूरी हो जाये ...
शिकायत है......!!!

सांग मना तुला नक्की हवय काय???

मनातल्या मनात चाललेला गोंधळ
आयुष्यातली नेहमीची पलापल
उगाचच होणारी चल बिचल
निर्विकार मन उदास चंचल
सांग मना तुला नक्की हवय काय ?
सगळ काही माहित असल्याचा आव
वाढत्या महागाईचा भाव
कशाचाच नसलेला ठाव
कुठली ती संस्कृति माझी नि कुठला गाव
सांग मना तुला नक्की हवय काय?
सततच चिंतन
भितिंच दर्पण
कसल ते आकर्षण
अणि आयुष्याच समर्पण
सुख टुख्हाची वन वन
आणि भविष्याची तन तन
सांग मना तुला नक्की हवय काय?
सोन्य चांदीच्या राशी
प्रेमाला उपाशी
शिंकते कुठे नेहमी माशी
सांग मना तुला नक्की हवय काय?
मनात होणार अंधार
दाखवतो निरंकार
दुश्प्रवृत्तिंचा संचार
की आप्त जनांचा आधार
सांग मना तुला नक्की हवय काय?
काय केल्याने चैन तुला पडेल
काय केल्याने मन तुझा रमेल?
जीवनाचा खेळ तुला जमेल?
काय असे तुला हवे हवेसे?
कशाने होइल प्रवास तुझा सुखद ?
धूसर आणि धुरत जगण सोडशील ?
स्वतहाला तू कसा काय समजवशील?
असेल उत्तर तर दे तू मला आज...
सांग मना तुला नक्की हवय काय?

Friday, March 18, 2011

गेहराई!!

गहरी बातोंकी गहराइया ...
और गहरे रिश्तोंकी परछाईया ...
गहरी सोच और गहरा समन्दर ...
गहरा वक़्त और गहरा समां...
उसी गहराई से जाने कब वो थमा ...
गेहराई से बिता हर वो लम्हा
और गेहराई की इस बात पे हर कोई गहरा और तनहा ॥
हद हो गयी अब गहराई की गहराई को भी गहराई से लगे डर ॥
और इसी गहराई में टुटके रूह , हर जिस्म जाये मर


Friday, February 25, 2011

स्वप्नश्रुष्टिचा सौदागर !!!

सुख दुक्खाच्या लाटेवर जीवन जणू एक सागर
मंतरलेल्या आयुष्यात मी स्वप्नश्रुष्टिचा सौदागर
रहस्यमयी हे जीवन सगले असे नात्यांचा गुंता
थोडा आनंद , थोडा वैताग असते सतत चिंता
वेगले तयाचे गणित दमलो भागता गुणता
कोण आपले कोण परके अन कुठली निरर्थक जनता
बारे वाटते स्वप्नच जादा नको आयुष्याचा जागर
मंतरलेल्या आयुष्यात मी स्वप्नश्रुष्टिचा सौदागर
शहान्यापरी वेडेच बरे असे कित्येकदा वाटे
मैत्रीच्या आशेत मनाला शत्रूच ज्यादा भेटे
लिहून पाहिली लाख आयुष्यावर आनंदाची गीते
घड़ा त्रासाचा भरतो जास्त अन सुख नेहमी रीते
स्वप्नामद्धे बहरलेला असतो हर एक मंजर
मंतरलेल्या आयुष्यात मी स्वप्नश्रुष्टिचा सौदागर
हवे नको ते मीच ठरवतो
मलाही तेथे मीच भुलवतो
सोन्याच्या राशिंचा तेथे मी बांधतो डोंगर
मंतरलेल्या आयुष्यात मी स्वप्नश्रुष्टिचा सौदागर
हिरवल्लेल्या रानामधे आनंदाची झाडे
सुबलता मुबलक अन मोठी तयांची खोडे
इंद्रधनूच्या रंगांपरी रंगीबेरंगी दुनिया
स्वप्नाच्या देशाची जणू हीच मोठी किमया
चंदेरी स्वप्नांना मिलते अद्भुतशी झालर
मंतरलेल्या आयुष्यात मी स्वप्नश्रुष्टिचा सौदागर




Wednesday, February 23, 2011

स्वप्न-परी !!!

स्वप्नातल्या जगात एक स्वप्न-परी भेटणार
अशीच आशा करून रोज रात्री झोपनार
झोपण्या आधी रोज केस बीस विंचरुन
मस्त डिजायनर परफ्यूम शर्टवर मारून
मित्रांना संध्याकाळी मस्त गोष्टी रंगवून
न पाहिलेल्या तिचं उगाचच अप्रतिम वर्णन करून
स्वतहाला अणि मित्रांना सहजच जलवुन
रोज रोज तिची वाट आतुरतेने पाहणार
स्वप्नातल्या जगात एक स्वप्न-परी भेटणार ||
लांब लांब केस नि मोठे मोठे डोले
पाहता क्षणी मन माझं स्वताहाशिच बोले
गोंडस छोटसं नाक नि तिख्या तिख्या पापण्या
सावारन्यासठी मजला युक्ति लागतील आखन्या
पाहता क्षणी तिच्यावर स्वप्नातच प्रेम करणार
स्वप्नातल्या जगात एक स्वप्न-परी भेटणार ||
उठतो रोज रोज सकाळी थोडासा हिरमुसून
त्याचाच विचार करून घेतो दात बीत घासून
कसे तरी समजावतो डोके तासून तासून
स्वताहालाच बघतो आरशात रोज आ वासून
स्वप्नातली ती बहुतेक स्वप्नातच राहणार
स्वप्नातल्या जगात एक स्वप्न-परी भेटणार ||

Monday, February 21, 2011

शब्द !!!

मंद मंद धुंध धुंध
अंतरंग धुन सुगंध
बंद बंद मर्म बंध
कोर कोर चन्द्र चन्द्र
चंचल तो स्तब्ध स्तब्ध
उलट सुलट रीती भाती
भाव त्यात रिक्त किती
ठाई ठाई भीती भीती
आरक्त प्रीति प्रीति
हार हार जीत जीत
पैसा अन प्रीत प्रीत
नियतीचे गीत गीत
धोका ही रित रित
अत्र तत्र पंचक्रोशी
विकृति ही अंगाशी
गाव गाव वेशी वेशी
सर्वांची ऐशी तैशी
आरब्ध प्रारब्ध
बोलताना स्तब्ध स्तब्ध
बोलवेना शब्द शब्द
बोलवेना शब्द शब्द

Saturday, February 19, 2011

विक्षिप्त !!! - मंथन

लख लखनाऱ्या वीजा आनी चम् चमनाऱ्या चांदण्या
अकल्पित जीवन अचानक डोक्यात झिन झिन्या
काव काव कावले नि चिव चिव चिमण्या
रहातात कोठे आनी का मनात माझ्या पाहुण्या ?
आज करवेना माझाच मला सामना
उथल खोल खोल गहीरया भावना
उगाचच होनारया संवेदना ||
झूल झूल वारा नि खल खल पानी
निसर्ग गातोय गाणी
वास्तव असे की स्वप्न लोचनी
भग्न मन संथ विचार अन चिम्ब वाणी
स्वच्छ सुन्दर मनात शांतता तूफानी ||
उंच उंच पर्वतरांगा आनी छोटी त्यांची कलसे
सरल सरल रस्त्याला देखिल घालतोय वलसे
भूते देखिल वाटू लागली माणसे
आनी माणसे किड्लेली कनसे ||
वख वखनार्या नजरा आनी मोगरयाचा गजरा
सुगन्धित फुलांचा घानेरडा वास अन सुखातला त्रास
दुख्हाची रास अन अगम्य आभास
नितल हवेत घुटनारा श्वास
सुमधुर संगीतात कर्कश्य आवाज ||
गर गर गिरक्या अन सर सर वारा
सहारयाला धरून बुडनारा की बुडून वाचनारा
जीवन मृत्यूचा खेल की खेलात जीवन मृत्य
सखोल पठार की पसरट दरी, वर ख़ाली की खाली वरी
संतप्त मनाची विक्षिप्त शांतता की शांत मनाचा संताप
आयुष्याचा खेल कधी कसा उमगनार
आयुष्य सुन्दर आहे ? त्याला अजुन सुन्दर बनवणार ?