खामोशी से दिल ने सबकुच सहा ...
खामोश रहे और कुच न कहा ...
खामोश निगाहे, खामोश राहे, और खामोश थे हम ....
इस खामोशी मी काही निकल न जाये दम...
खोमोशी से देखे थे सपने कई ..
राहे थी जुदा लेकीन मंजिल थी वही ...
खामोश लबोपे खामोश तराने थे
खामोश लाम्होन्मे भी खामोश फसाने थे...
तू खामोशिसेही खामोशी को सून
तू खामोश बनके खामोशी हि चून
खामोश लब्जोन्से हि खामोश है धून
खामोश जहान खामोश हम और खामोश तुम ...
दिलने भी तुमको पुकारा है खामोशी से
दे दे आवाज तुभी आज खामोशी से..
आन्खोन्की हो बोली और धडकन कि जुबान
चाहे आन्खोन्को हि कह दो आज तीर कमान
बस दिल को लागलो थोडी सी लगाम
और खामोशी से हि करू मै तेरे दिल को सलाम ..
खामोश दिल खामोश धडकन और खामोश है ये पल..
और खामोशी से हि तू आज जमाने से जल
खामोश लम्होमे करले तू जिंदगी को उजागर...
खामोशी सेही बनजा तू सपनोंका सौदागर...
खामोशी से .. !!!!!